खाद्य सुरक्षा अधिकारी प्रियंका सिंह ने गुटखे की दुकान पर मारा छापा,गुटखा माफिया में मचा हड़कंप …

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उरई-जालौन :- कोतवाली से चंद कदम की दूरी पर चल रहे गुटखे के अवैध कारोबार के खिलाफ सोमवार को खाद्य विभाग ने अभियान चलाया। मुख्य मार्ग पर स्थित अवैध गुटखे की दुकान पर छापा मारा गया। हालांकि लाखों रुपए का कारोबार प्रतिदिन करने वाली इस दुकान से खाद्य विभाग को मात्र आधी बोरी गुटखा ही मिल सका। जब्त किए गए गुटखे का सैंपुल भरकर जांच के लिए लैब में भेज दिया गया है। खाद्य सुरक्षा अधिकारी का कहना है कि रिपोर्ट आने के बाद गुटखा बेचने वाले मालिक के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। सोमवार को सुरक्षा अधिकारी प्रियंका सिंह ने सोमवार को अपनी टीम के साथ शहीद भगत सिंह चैराहे पर भैरव गुटखा के काउंटर पर छापा मारा। यहां पर उन्हें ताजा व वीआईपी तंबाकू मिश्रित गुटखा बिकता हुआ मिला। मौके से करीब आधी बोरी गुटखा मिला जिसे जब्त करने के बाद सैंपुल भरकर जांच के लिए लैब में भेज दिया गया है। इस कार्रवाई से गुटखा माफिया में हड़कंप मचा रहा।

मजे की बात यह है कि अवैध गुटखा का यह काउंटर उरई कोतवाली से चंद कदम की दूरी पर ही स्थित है और पुलिस की नाक के नीचे कई वर्षों से यह अवैध कारोबार संचालित हो रहा है और पुलिस को इसकी भनक तक नहीं है। इससे पुलिस की कार्यशैली पर सवालिया निशान लगने लगे हैं। सूत्रों की मानें तो जिस अवैध गुटखा काउंटर पर खाद्य विभाग ने छापा मारा है उस काउंटर से रोजाना लाखों रुपए का गुटखा शहर में सप्लाई किया जाता है। कई वर्षों से यहां पर यह अवैध गुटखे का कारोबार चल रहा है पर हर बार सिर्फ औपचारिकताओं में कार्रवाई पूरी कर दी जाती है। इस बारे में खाद्य सुरक्षा अधिकारी प्रियंका सिंह का कहना है कि मौके से बरामद हुए माल में सुपारी के साथ तंबाकू भी मिश्रित होने का अनुमान है। सैंपुल को जांच के लिए भेज दिया गया है। रिपोर्ट में तंबाकू मिश्रित गुटखा की पुष्टि होने के बाद गुटखा मालिक के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

बेवा ने लगाया फर्जी वसीयत बनाने का आरोप

पीड़िता ने एसपी को सौंपा शिकायती पत्र, की कार्रवाई की मांग

उरई,जालौन :- फर्जी तरीके से वसीयतनामा बनवाकर जमीन हड़पने का आरोप लगाते हुए एक बेवा ने पुलिस अधीक्षक को शिकायती पत्र दिया है और आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। ग्राम सिमिरिया निवासी सावित्री देवी पत्नी स्वर्गीय विजय कृष्ण ने पुलिस अधीक्षक व जिलाधिकारी को शिकायती पत्र देकर बताया कि कुछ लोगों द्वारा फर्जी वसीयत तैयार कर ली गई है। उन्होंने कहा कि उसके पति विजय कृष्ण ने अपने जीवनकाल में कभी भी चल अचल संपत्ति की कोई भी वसीयत उमाशंकर, गिरजा शंकर, रक्षा व सावित्री के हक में नहीं की। उन्होंने कहा कि पति की मृत्यु के बाद उक्त लोगों ने फर्जी वसीयत तैयार कर ली जिस पर उसके पति स्वर्गीय विजय कृष्ण के हस्ताक्षर नहीं है। आरोप लगाया कि उक्त लोग रजिस्ट्रार कार्यालय से सांठगांठ कर वसीयत का पंजीकरण कराना चाहते हैं। पीड़िता ने मांग की है कि उक्त लोग बनाने वालों व गवाहों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।

महरौनी से बृजलाल खाबरी को मैदान में उतारने का फैसला…

उरई :- सपा से गठबंधन के बाद यूपी में कांग्रेस पूरी गंभीरता से विधानसभा चुनाव लड़ने के मूड़ में है तांकि साझेदारी में अपने हिस्से में आई सीटों में ज्यादा से ज्यादा पर कामयाबी हासिल कर सके। इसी सोच के तहत बुंदेलखंड में पार्टी ने बड़ा धमाका पूर्व सांसद बृजलाल खाबरी की ललितपुर जिले की महरौनी सीट से उम्मीदवारी की घोषणा के जरिये किया है।
बुंदेलखंड की राजनीति में खाबरी बड़ा नाम है जो कि बसपा में नंबर-2 जैसी हैसियत में काम कर चुके हैं। एक समय बुंदेलखंड में तो बसपा के सारे टिकट उन्हीं की संस्तुति पर बांटे जाते थे।

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हाल में मायावती से मतभेद होने के बाद जब उनका कांग्रेस से संपर्क हुआ तो कांग्रेस ने दलित वोटों के लिए मायावती के मुकाबिल सबसे असरदार विकल्प के रूप में उन्हें हाथों-हाथ लिया। उनसे जुड़ी संभावनाओं के पूरी तरह दोहन के लिए कांग्रेस ने उन्हें विधानसभा चुनाव में मैदान में उतारने की रणनीति अख्तियार की क्योंकि कांग्रेस और समाजवादी पार्टी दोनों को ही आशा है कि खाबरी की उम्मीदवारी से पूरे बुंदेलखंड में मायावती के किले को हिलाने में कामयाबी हासिल की जा सकेगी। इस बीच नामांकन पत्र भरने की तैयारी के लिए बृजलाल खाबरी सोमवार को यहां अपने घर आ गये हैं। इस दौरान उनके घर राजनैतिक सरगर्मियां तेज रहीं और नामांकन के दिन ही उनके चुनाव की असरदार छाप महरौनी के लोगों पर डालने की रणनीति बनाई जाती रही।

बुंदेली संस्कृति को संरक्षित करने का कार्य करेगी संस्था …

कोंच– बुंदेली संस्कृति एवं लोक कला संवद्र्घन संस्थान ने तय किया है कि संस्था अन्य सामाजिक सांस्कृतिक क्रियाकलापों के अलावा गोसेवा के भी कार्य करेगी। उक्ताशय की जानकारी देते हुये संस्था के मीडिया प्रभारी राहुल राठौर ने बताया है कि संस्था का उद्देश्य बुंदेलखंड की लोक परंपराओं और लोक रीतियों का संरक्षण और संवर्द्धन करना है। संस्था होली के अवसर पर रंगारंग महामूर्ख सम्मेलन का भी आयोजन करेगी।

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संस्था की महत्वपूर्ण बैठक बीती देर शाम संस्था कार्यालय पर संपन्न हुई जिसमें संस्था के क्रियाकलापों पर चर्चा हुई, साथ ही कार्यकारिणी का भी गठन किया गया। अध्यक्ष रमेश तिवारी, उपाध्यक्ष/प्रबंधक पुरुषोत्तमदास रिछारिया, मंत्री नरोत्तमदास स्वर्णकार, कोषाध्यक्ष अतुल शर्मा, अंकेक्षक सूर्यदीप सोनी तथा कार्यकारिणी सदस्य कृष्णकांत वाजपेयी, गौरीशंकर झा, आनंद पांडे, संजय अग्रवाल दतियावाले, वीरेन्द्र त्रिपाठी, राहुल राठौर, करुणानिधि शुक्ला, अभिषेक रिछारिया पुन्नी सर्व सम्मति से चुने गये। बैठक में सर्व सम्मति से तय किया गया कि आगामी 13 मार्च को होली के अवसर पर संस्था परंपरागत रूप से आयोजित होने बाले रंगारंग महामूर्ख सम्मेलन का भी आयोजन करेगी।

इंफोसिस की महिला कर्मचारी की दफ्तर के भीतर गला घोंटकर हत्या …

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पुणे के हिंदजवाडी स्थित इंफोसिस कार्यालय में कार्यरत एक महिला सॉफ्टवेयर इंजीनियर की रविवार को कथित तौर पर गला घोंटकर हत्या कर दी गई. राजीव गांधी इंफोटेक पार्क में स्थित इंफोसिस कार्यालय में 25 साल की के. रासिला राजू की हत्या कंप्यूटर के तार से कथित तौर पर गला घोंटकर की गई. पुलिस ने इस मामले में कंपनी के सिक्योरिटी गार्ड को हिरासत में लिया है.

यह घटना इंफोसिस बिल्डिंग की नौवीं मंजिल पर हुई. रसिला के गले में लपटी हुई कंप्यूटर के केबल पाई गई. रविवार को छुट्टी होने के बावजूद वह काम के सिलसिले में दोपहार ढाई बजह के करीब ऑफिस पहुंची थी. कुछ घंटो उसने अपनी चेन्नई की एक सहयोगी से ऑनलाइन बातें भी की, लेकिन 5.30 बजे से छह के बीच उसकी हत्या हुई. कंपनी में ही काम कर रहें सुरक्षा कर्मी पर पुलिस ने शक जताया है.

सहायक पुलिस आयुक्त वैशाली जाधव ने बताया, ‘‘यह घटना शाम में पांच बजे के आसपास घटित हुई होगी, लेकिन हमें देर शाम करीब आठ बजे जानकारी मिली. रासिला इस कंपनी के साथ सॉफ्टवेयर इंजीनियर के तौर पर काम कर रही थी.’’

​भ्रष्टाचारी लेखपाल का खेल बेनकाब …

★ कृषि प्रधान देश में किसानो की दशा दयनीय
★ चुनाव के समय भी नेता नही ले रहे किसानो की सुध बुध

★ किसान संगठनो ने भी नहीं उठाई किसान हक़ की बात

★ अफसरों की मनमानी का दंश झेल रहे किसान

उरई जालौन :- ग्राम करमेर विकास खण्ड डकोर में लेखपाल की खाऊ कमाऊ निति के कारण सारा गॉंव परेशानी का शिकार है सूखा राहत की राशि सभी गाँवो में

वितरित हो चुकी है तो बही ग्राम करमेर में नियुक्त लेखपाल अपनी तानाशाही रवैये के कारण ग्राम वासियो को परेशान किये हुए और चेक के बदले कैश की निति को लागू किये है और आलाधिकारियों की परवाह किये बगैर धन उगाही में लिप्त है लोगो ने जब लेखपाल से पूछा तो बोला मेरी कोई गलती नहीं हे पैसा खाते में न आना सरकार की कमी है

आज इसी के विरोध में पूर्व प्रधान शिव सिंह के नेतृत्व में सभी ग्राम बासियो ने सैकड़ो की संख्या में इकठ्ठा होकर तहसील परिसर में धरना दिया और और तहसीलदार को लिखित शिकायती पत्र दिया और बताया की लेखपाल कभी गाँव नहीं जाता है उरई में ही बैठे बैठे कुछ दलालो और चाटुकारो की बातो में आकर काम के नाम पर दाम कमाने का कार्य करता है

इस बीच कृष्ण गोपाल , रामसिंह, अमर सिंह, दयाराम, खेमचन्द्र, चरन सिंह, अरविन्द, मूलचंद, हरपाल, संतराम आदि लोग उपस्थित रहे

रेप मामले में सुप्रीम कोर्ट ने आसाराम बापू को नहीं दी जमानत …

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नई दिल्ली. नाबालिग से रेप के आरोप में तीन साल से भी अधिक वक्त से जेल में बंद आसाराम बापू को सोमवार को सुप्रीम कोर्ट से करारा झटका लगा, जब उनकी ज़मानत अर्ज़ी खारिज कर दी गई। आसाराम बापू ने मेडिकल ग्राउंड पर की अंतरिम ज़मानत की मांग की थी। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जांच रिपोर्ट से साफ है कि उनकी मेडिकल हालत ऐसी नहीं है कि उन्हें ज़मानत दिए जाने की ज़रूरत हो।
‘तबीयत खराब है तो MRI कराने से इनकार क्यों?’
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आसाराम ने खुद ही बिना कोई कारण बताए MRI कराने से इनकार कर दिया है। इससे साफ है कि उनकी हालत ज़्यादा खराब नहीं है। कोर्ट ने कहा कि इन मेडिकल रिपोर्टों को आधार बनाकर ज़मानत नहीं दी जा सकती। सरकार की ओर से भी कहा गया था कि आसाराम को इस तरह जमानत नहीं दी जा सकती, क्योंकि पहले भी उन्हें जोधपुर के सबसे बड़े अस्पताल में उपचार के लिए भेजा गया था। मगर ृआसाराम ने खुद ही कई टेस्ट कराने से इनकार कर दिया था।
जस्टिस आरके अग्रवाल सुनवाई से अलग हो गए थे
सुप्रीम कोर्ट में इस मामले से जुड़ी पिछली सुनवाई में जस्टिस आरके अग्रवाल ने सुनवाई से खुद को अलग कर लिया था। अब मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस की बेंच कर रही है। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने एम्स के बोर्ड से 10 दिन में जांच रिपोर्ट मांगी थी। इसके बाद एम्स ने अपनी रिपोर्ट दाखिल कर दी थी। बता दें कि आसाराम पिछले तीन साल से जेल में बंद हैं। वह पहले भी मेडिकल आधार पर जमानत की मांग कर चुके हैं लेकिन सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिल पाई थी।